Monday, May 17, 2010

आन्तराष्ट्रीय निगम तथा भूमंडलीकरण प्रक्रिया

आन्तराष्ट्रीय  निगम तथा भूमंडलीकरण प्रक्रिया:  बहुराश्त्रिये निगम तथा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश + प्रोद्योगिकी प्रवाह: विदेशी निवेश की समस्या: 1. 1955- रिओ दे जनेरो सम्मलेन जार्ज हम्फ्रे क़ा विवादस्पद भाषण, 2.अविश्वास ३.पडोसी देश सम्बन्ध ४.उचित जानकारी/परामर्श आभाव ५.विश्वास ६.कानून ७.स्वाभ ८.ऐतिहासिक मित्रता; विदेशी विनयोग क़ा लाभ: 1.आर्थिक विकास 2.तकनिकी लाभ/ बहार से तकनीशियन आते जैसे USA में इंडिया से 3.पटेंट लाभ: कर्येशील कंपनी को 4.सुचना/ यातायात लाभ; विदेशी विनियोग क़ा विरोध:  1.राष्ट्र हित  देखना 2.उपनिवेश साम्राज्य न बने-जैसे east india company 3.ब्याज/ लाभांश क़ा खतरा 4.अफ्रीका विभाजन उद्धरण है 5.कर्जों से युद्ध/ झगडा-जैसे जर्मन युद्ध पोत 6.शीत युद्ध क़ा खतरा विरोध के कारण: 1.विदेशी कोम्पनी घुस/ लालच देती- अच्छे पद प्रलोभन 2.हस्तक्षेप की धमकी 3.विशेषाधिकारों हनन 4.अविश्वास 5.1930 के दशक में घोर मंदी, राष्ट्रवाद क़ा उदय: 1. अल्पविकसित देशों को खतरा, 2.सुविधाएँ खोलना- सकारात्मक आयाम; फार्म के आन्तरिक तथा फिर्मो के बिच व्यापार की समस्या: faith relation -1.विदेशी विनयोग/ साधनों की कमी: पूंजी की कमी, तकनिकी/ कानून/ श्रम/ परामर्श/ प्रबंधन/ कमी,  2.विदेशी विनयोग शर्तें: (i).कानूनों क़ा पाबंद/ इज्जत (ii).समानता/ विशेषाधिकारों-इज्जत/ पक्षपात नहीं (iii).स्थानीय लोग ही/ स्थानीय कच्छा माल/ labour law इज्जत (iv).MNCजिस देश में आये उसमे ही लाभान्वित पूंजी- ना की अपने देश (v).MNC को स्थानीय राजनीती हस्तेक्षेप नहीं (vi).लाभ पूंजी क़ा कुछ ही हिस्सा अपने देश बाकि यहीं खपाओ 3.आन्तर राष्ट्रीय उत्पादन संजाल (business नेटवर्क): विदेशों में इकाइयाँ (जाल) लगाना/बनाना,  तकनिकी नेटवर्क बनाना, काछे मल क़ा नेटवर्क, क़ानूनी जानकारी, नेटवर्क के खतरों से चौकन्ना, संजाल हेतु विदेश नीतिओं क़ा ज्ञान, विकसित/विकासशील देशों जानकारी, storage  ज्ञान;  अन्तेर्रश्त्रिये पूंजी बाज़ार क़ा ढांचा / कार्यप्रणाली: विभिन्न मुध्हे जैसे = 1.विनमय दर 2.रिजर्व निति 3.निजी क्षेत्र की भूमिका 4.पूंजी प्रवाह 5.प्रबंधन 6.वित्त प्रणाली/ सशक्तिकरण 7.पारदर्शिता 8.मानक 9.अन्तेर्रश्त्रिये संस्थाएं (WTO, World Bank, GATT) 10.मुद्रा संकट निवारण- मुद्रा बोर्ड गठन 11.कीमत नियंत्रण 12.बैंक हस्तेक्षेप जरुरी 13.नीतिगत उपाए-ऋण सेवा, सेंट्रल बैंक, मुद्रास्फीति दर/ संतुलन 14.मौद्रिक निति- विनमय दर, ब्याज दर, मुद्रा भंडार आकर  15.भारत की निति:1993 में विकसित, मांग/पूर्ति प्रबंधन, अच्छे बाजार विकसित, फोरेक्स बाजार सर्तार्कता अछि, मार्केट लचीली 16.अन्तेराष्ट्रीय भण्डार: 1.विदेशी मुद्रा भंडार-मौद्रिक निति, मुद्रास्फीति नियंत्रण, आपातकाल प्रबंधन, खतरों से बचाव जानकारी, एशिई संकट से उदहारण, 17.पूंजी प्रवाह: 1.भारत में हम गई ऋण उत्पादक प्रवाहों और जोर न देने वाले ऋण अल्पकालीन ऋण से भण्डारण कर रहे है 2.1993- भुगतान संतुलन समिति (रंगराजन समिति) रिपोर्ट 3.रिजर्व बैंक नियमों 4.जोखिम नियंत्रण 5.तेल कीमत वृद्धि- प्रबंधन (2002 में विदेशी मुद्रा भंडार ४.९२ बिलियन $ था, जबकि 1999-2000 में 5.5 बी);  अन्तेराष्ट्रीय सम्पदा (Assets) व्यापार: 1.पूंजी-अंतररा० Transfer प्रक्रिया- पूंजी हस्तांतरण  2.1918 yudh मुआवजे सम्पदा अदन प्रदान 3.विदेशी मुद्रा/ स्टॉक लाभ 4.मुद्रा के प्रकार -सोना, वास्तु, यूरो, dollor , money transfer, virtual money 5.क्षति पूर्ति भुगतान-सोने के स्थान पर वस्तुओं द्वारा चुकाना gold क़ा sanrakshan 6.मिल:सोने क़ा हस्तांतरण रोकना संभव 7.नए सिधांत: केन्स"युद्ध काल में मुद्रा चलन/ मदद/ भुगतान, ऋण"  8.सिधांत/ सत्ये- कथनी करनी में फरक 9.ओलिं के विचार- "एक से मुद्रा से सोने क़ा स्थानान्तरण रुकेगा" इंग्लैंड स्कॉट्लैंड मामला 10.क्रय शक्ति क़ा हस्तांतरण:  ऋण के कारण करए शक्ति हस्तांतरण, (क)उधर लेने वाला देश धन विदेशों में लगता तो स्वर्ण हस्तांतरण से बचाव  11.अगर अपने ही देश में उधार क़ा धन लगाना- तो क्रय शक्ति से- मूल्य बढेंग, लेकिन बचाव संभव  12.ऋण क़ा हस्तांतरण- ऋण अंत में वस्तुओं / सेवाओं के रूप में एक से दुसरे देश वापस जाता, सही प्रबंधन से सोने क़ा स्थानान्तरण रुक सकता,  तटपारिये   बैंकिंग / विदेशी बैंकिंग: अमेरिकेन फेडेरल Reserve Act 1913-अपने उच्ता प्राप्त बैंकों को विदेशों में शाखा अनुमति दी है, "कोई भी नेशनल बैंक विदेशों में ब्रांच - लेकिन उसमे अपनी पूंजी -स्टोक क़ा १०% से अधिक विनयोग नहीं करेगा", अभी तक ४०० से अधिक शाखाएँ, उपयोगिताएं/ लाभ: 1.यूरो / dollor  क़ा बढ़ता उपयोग- 2.जापान क़ा विशिष्ट विदेशी विनियम बैंक-   1954 "Bank of Tokyo" japan में २५ शाखा, विदेश में १८, agency २०, प्रधान कार्यालय USA में 3.जापान में विदेशी बैंक- 1970 में १८ विदेशी बैंक थे, बैंक law  के अंतर्गत लिसेंस जरुरी, एन में ऋण चलता, न्युयोर्क, लन्दन, मुंबई, पेरिस में शाखाएं, विदेशी महत्त्व खास नहीं  4.विदेशी विनियम क़ा कार्य (Foreign Exchange Importance)- लिसेंस देना , Law   Making, Exchange Rates Controler, Counselling, Liberal Actions 5.Euro मुद्रा- 1.Urope   की  मुद्रा, 27. सदस्य  राष्ट्रों  में  16. द्वारा प्रयोग, आस्ट्रिया, Belgium , Siprs, Finland, Frans, German, Grees, Ayland, Itly, Lkjembrg, Malta, Nirherland, . 174 देशों  द्वारा  प्रयोग , $ के  अछि  अरक्षित  मित्र, 2009 में  790 billion से  अधिक, 2. यूरो  क़ा  विकास - 16,Dec.95 को astitv, 1999 me E.C.U द्वारा प्रयोग , 2002 में  सिक्के / not, 2009 me lisbn sandhi hence uropean mudra bani, prabandh/ prashasan: Uro Deshon ke Kendriye Bank Sangathan 'uro system' dwara hota, 1992 mastrikt sandhi- hence Uro ko apnana anivarye (bhedbhav jari hai), Uro Currency (Type)-100 Cents, 1-2, 3 Cent ke sikke, Natonal SIgn Printed, Euro hastantran: sabhi hastantran= gharelu bhugtan, credit, debit, ATM nikasi, Home rates(dar) par hastantran, Euro ka prachalan:1992 mastrikt sandhi dwara prachalit, kadi sharten, jaise GDP 3% se mam bajag ghata, 60% se kam rin. Euro Nirmata(Khojkarta): Fred Arditti, Neel Dowling, Vim Dusem Barg, Robert Mondel, Tomaso Pdoa, Shioppa, robert Tolisn.

आर्थिक गतिविधि क़ा भौगोलिक ढांचा

आर्थिक गतिविधि क़ा भौगोलिक ढांचा: 1.कचे माल वितरण- सुलभ यातायात मार्ग, उदहारण east इंडिया co, मौर्य, 2.जैविक स्संराचना/जीव: जीवों पारिस्थितिक स्थिति 3.जिवोम/आवास:जलवायु(BIOM/HABITAT)-पर्यावरण/biomass 4.मिश्रित जलवायु: भारत, रूस, चीन...=अधिक पैदावार 5.भोगौलिक कारक: गंगा घटी, समुद्री मार्ग, अलक्जेंडर गमन, बंदरगाहों विकास 6.खनिज/धातु उपलब्धता: भारत(Pb,Zn ,Diamond, Oil, Fe, कोयला उरेनियम), रूस, अफ्रीका, अमेरिका, अंतर राष्ट्रीय व्यापार के रूप: 1.व्यापर नीति: भगौलिक विभाजन, प्लानिंग, मैनेजमेंट, +ve कानून 2.रिकार्डो क़ा सिधांत:"हर देश की अपनी विशेषता- जैसे=कच्छा माल/श्रमिक/ उत्पादक/ तकनिकी"..., 3.लिस्ट की आलोचना: भेदभाव/ कर/ जरुरी, पंचों उँगलियाँ बराबर नहीं 4.लोहिया के विचार: "मेहनत के हिसाब से कीमत होनी - न की मल की मात्र के हिसाब से जैसे- 1. करोड़ क़ा मल अलग अलग देश अलग समाये में.." विदेशी प्रत्यक्ष निवेश तथा पूंजी प्रवाह: 1.पूंजी प्रवाह प्रबंधन: अशिई संकट से बहस, अंतरा० बैंक, money transfer, ऋण, भण्डारण, परामर्श, मुद्रा कोष, कानून, पूंजी/ कर, निवेश, exchange  rate 2.वित्तीय प्रणाली क़ा सशक्तिकरण: IAF (अन्तर्र० प्रमाणन मंच) बहस/ सुझाव A.सुव्वावस्थित संरचना B.पूर्ण न्याय C.corporate  नियंत्रण D.audit प्रणाली E.सक्षम भुगतान, F.पूंजी G.जोखिम H.IOSCO-मार्गदर्शन;;

संप्रेक्षण प्रद्योगिकी में विकास

संप्रेक्षण प्रद्योगिकी (IT/Communication Tehnology)में विकास: POSITIVE: 1.सुचना क्रांति-भूमंडलीकरण में सहयोग -व्यापर  के  अवसर , 2.ज्ञान वृध्ही  3.शिक्षा  में लाभ  4.सचित्र  विवरण  5.तकनिकी सुरक्षा 6.भाषा  विस्तार  7.व्यापार अवसर/ नया  बाज़ार  7(a).online income 8.सर्च ENGINE  9.राष्ट्रीय/ अन्तेर्रश्त्रिये कानून जानकारी 10.उदारवाद को बल- ब्लोग्स 11.ब्लॉग्गिंग सुविधा 12.chatting द्वारा भुमंद्लिये विकास 13.सांस्कृतिक अदन प्रदान 14.तकनिकी विकास 15.पर्यावरण  16.शब्दकोष 17.आर्थिक  18.राजनैतिक लाभ 19.चिकित्सा जगत 20.इंजिनियर 21.न्यूज़ 22.चलचित्र/U-Tube 23.मीडिया जगत 24.नौकरी-देश विदेश 25.विवाह-देश विदेश 26.सुचना store   27.देश  सुरक्षा  28.किसान  लाभ  29.भौगोलिक  ज्ञान ;;
NEGETIVE - 1.आतंकवाद / गोप्निअता  2.भाषा 3.सेक्स/ सांस्कृतिक 4.हथिआर/ बम 5.खतरनाक सूचनाएं 6.chatting- मानसिक युद्ध 7.भौगोलिक ज्ञान-चोरी  8.hacking  9.spamming 10.virus 11.saftwate चोरी 12.wrong identity (orkut) 13.जासूसी 14.धोखेबाजी/ ठगी (cyber crime) 15.गलत सूचनाएं 16.ip tracking जासूसी 17.Bagging/ illegal donations 18.health/ बीमारियाँ;

विकसित/ विकासशील देशों में आर्थिक निति परिवर्तन

विकसित/ विकासशील देशों में आर्थिक  निति परिवर्तन: 1.बड़े बाज़ार की मांग: विकास-शील को 2.अर्थोर लुईस मॉडल: पूंजी output अनुपात बढ़ रहा, निर्भर मत बनो  3.जापान उभरा: (1953-73)-प्रति व्यक्ति आए वृद्धि/ बराबरी करने में सफल 4.भारत में परिवर्तन: 1991 आर्थिक संकट, नियंत्रित अर्थव्यस्था लागु- राजस्व घटे कम करे गए, (1992-93) vikas dar 6.5%, सुधर हुआ, (2000-२००१) तेल कीमत वृद्धि- लेकिन controlled , मुद्रास्फीति दर कम हुई, मनमोहन सिंह नियंत्रण 5.वित्त और विकास क़ा बदलता स्वरुप: बचत दर नियंत्रित, नए बैंक, लोन अआसान, विदेशी सहयेता अछि रही 6.वित्तीय प्रणाली: सुचारू होनी, 1997 के मध्ये में पूर्वी एशिआई संकट, 70/80 के दशक में ब्याज/विनमय दर नियंत्रित 7.विकसीत देशों में आर्थिक निति परिवर्तन: 1997 के बाद एशिया में वित्तीय संकट तेज़, अंतराष्ट्रीय चिता थी, IAF (अन्तर० वित्तीय संरचना)  क़ा गठन (a)1997 संकट आकस्मिक था, अनुमान नहीं (b)दुसरे देशों में भी असर (c)कमज़ोर बाज़ार प्रणाली थी (d)बोझ सरकारी/ सार्वजानिक पर पड़ा (e)प्रशन उठे IMF  द्वारा  (f)विकसित देश प्रभावित hence- ध्यान बहुगुणा 8.एशिई संकट- IMF पर असंतोष, पारदर्शिता की मांग, OECE / non-OECD देशों के बीच, विभाजन  9.बहस के स्तर- देश/ विदेश बहस, G-7/ G-24 से विषार विमर्श;

1970 के बाद विश्व अर्थव्यस्था में निरंतर बदलाव

1970 के बाद विश्व अर्थव्यस्था में निरंतर बदलाव (continuity and changes): 1.नव उदारवादी व्यस्था लागु (सकारात्मक): लोकतंत्र, स्वंत्रता, मानवाधिकार, एक ध्रुवता, सैन्य शक्तियाँ,  2.एकीकृत विचार लाभ: सभी एकमत  3.वैश्वीकरण की दिशा निर्धारण: उतर चढाव, MNC सत्ता/पूंजीवाद डर, भविष्य अनिश्चित  4.अंधाधुंध आधुनिकीकरण: प्रदुषण 5.सांस्कृतिक सम्रज्येवाद: मानसिक खतरा 6.शासक कुलीन वर्ग: वर्ग्शोषण/ सम्रज्येवाद क़ा खतरा 7.अज्ञात/ अपरिभाषित युद्ध- कानून निरिक्षण जरुरी 8.खुली आँखों के सपने (day dreaming)- सफ़लत कठिन 9. बाज़ार बनाने की सफलता: खली पेट युद्ध, जानकारी/प्लानिंग जरुरी;

Sunday, May 16, 2010

Negetive Effects of Globalization

भूमंडलीकरण नुक्सान: 1.लम्बी एवं संदेहास्पद प्रक्रिया- गरीब देशों की मज़बूरी 2.लाभों क़ा संदेहास्पद वितरण/ अंतराष्ट्रिये समानता जरुरी 3.हिस्सेदारी न्यायसंगत- संदेह, सही विकल्प जरुरी 4 .गरीबी/ बेरोजगारी जारी-किसान/ बर्जुआ आत्महत्या 5.कमज़ोर बाज़ार अर्थव्यस्था- सार्वजानिक नीतियाँ/पारदर्शिता जरुरी 6.प्राक्रतिक संसाधनों क़ा शोषण- बहुराश्त्रिये कंपनियां- कृषि, जंगल/जड़ी बुटिओं, नदी, मृदा, वायु    7.ओपनिवेषिक/ शोषण-पूंजीवादी देश गरीब देश पर शासन करता 8.भाषा विनाश/ क्षेत्रीय भाषा+ हीन भावना  9.पूंजीवाद/उपनिवेशवाद स्पष्ट - दास प्रथा 10.पटेंट कानून- विवादास्पद 11.मार्क्सवाद पर संकट - सुधर संभव 12.क़र्ज़ बढ़ना- संदेह 13.नव धनाध्ये वर्ग उदय 14.षड़यंत्र की सम्भावना  15.निजीकरण (नुक्सान) 16.आमिर/गरीब देश खाई- बढ़ी 17.WTO नियम थोपना - अंधे/मनमाने कानून 18.सांस्कृतिक/ नैतिक/ धार्मिक विनाश इन्टरनेट शोषण- (ऑस्ट्रेलिया-हिंसा) सेक्स/ हिंसा/ copyright  19.BPO= शोषण/ स्वस्थ्य/ दिमागी नाश 20.copyright की धज्जियाँ-कानून संदेह 21.देश सुरक्षा/ गोप्निअता- खतरा/ भेदिकरण 22.मानसिक कुठाराघात- श्रमिक 23.विदेश नीतिओं सावधानी जरुरी 24.संधियाँ/ परमाणु संधि-  25.अल्पसंख्यकों/ आदिवासिओं - शोषण/ प्रतिओगिता में पीछे 26.पर्यटन= शोषण/ होटल/फैक्ट्री लगाना 27.मानवाधिकारों क़ा हनन-गरीब=गरीब, आमिर=आमिर 28.उदारवाद पर चोट- पूंजीवादी/ साम्राज्यवादी शोषण 29.श्रम कानूनों में कमी (जीवन क़ा मशीनीकरण)- वेतन/शोषण/छंटनी 30.तेल कीमत वृद्धि (१९६०) 31.महंगाई - विदेशी वस्तुएं  32.मांग पूर्ति- वितरण गड़बड़ी 33.अंधाधुन्द निवेश-(1980) ब्याज दरों वृध्ही  34.कृषि समझौता (उरुग्वे round)-शुल्क विवाद (१०% कम कारो) 35.मुद्रा दर संकट- शेरे मार्केट नुक्सान/ कर्रेंच्य गिरना 36.अन्तरिक्ष सन्येकरण- खतरा 37.उपग्रह संकट- गूगल 38.उपजाऊ भूमि शोषण- होटल/ factorie लगाना  39.सुचना गोपनीयेता- परिणाम छिपाना  40.सरकारी मिलीभगत- घूसखोरी 41.पूंजी केवेल आधुनिकीकरण की ओर - उदारवाद पर कम; 42.शोध/ रिसर्च क्षति 43.स्थानीय व्यापारिओं को हानि- प्रतिस्पर्धा 44.ऋण चुकाने हेतु किसानों पर ऋण क़ा बोझ डालना- कई देशों में  45.आतंकवाद को बढ़ावा- imigration से 46.क्रांति और युद्ध क़ा खतरा बना रहेता  47.कभी शीत युद्ध जैसी स्तिथि भी हो सकती 48.19 वीं शबत्दी - असफलताएं   49.स्वदेश बहिष्कार- बेरोज़गारी/ उपेक्षा 50. असंतुलित विकास-१९वे शताब्दी 51.एशिआई संकट- (OECD) आर्थिक  विकास  संगठन  भेदभाव + OECD . 52 . विदेशी पूंजी दुरूपयोग-  53. अस्मिता संकट (शहरीकरण)- टूटते परिवार 54.अंतरराष्ट्रीय  तनाव -competetion  =तनाव  55.आधुनिकीकरण=महिला शोषण- भ्रूण हत्या  56.बहुलवाद- प्रदेश विभाजिकरण (हिमाचल/ छत्तीसगढ़) 57. 58. 59. 60. 61. 62. 63. 64. 65. 66. 67. 68. 69. 70. 71. 72. 73. 74. 75. 76. 77. 78. 79. 80. 81. 82. 83. 84. 85. 86. 87. 88. 89. 90. ...

Friday, May 14, 2010

GLOBALIZATION (IIIRD YEAR) DELHI UNIVERSITY (2010) SYLLABUS

U-1 भु० तथा नई भु० अर्थव्यस्थावैश्वीकरण: एक मनोविज्ञानिक प्रक्रिया, भूमंडलीकरण उदय/इतिहास: इंदु घटी सभ्यता से, अलक्जेंडर, बर्लिन दिवार -2nd विश्व युद्ध के बाद; पूंजीवादी गढ़जोड़- पूंजीवादी देश विकासशील देशों को- अधीन कर रहा, बाज़ार अर्थव्यस्था/नया युद्ध: औद्योगिक समाज विस्तार, अमेरिका/जापान- औद्योगिक अपनी स्थिति कायम, सुचना समाज क़ा जनम, टकराव के कारण: शीत युद्ध के बाद, घेरेलु कम्पनियां  बंद लघु उधोग नष्ट, बेरोज़गारी^, राजस्व में कमी, MNCs क़ा हस्तक्षेप^; तीसरा शांत युद्ध: विद्वानों क़ा मत के तीसरा शांत युद्ध शुरू/ सारी दुनिया को ध्वस्त/ बेरोज़गारी; न्यायपूर्ण साझेदारी: न्यायिक रूप से अच्छा हुआ, कानूनों/ आदान प्रदान लाभ, लाभों क़ा वितरण: दवाएं, पटेंट, प्रद्योगिकी, अंतराष्ट्रीय व्यपार, अधिक न्यायासंगति की अव्यक्षता है;  न्यानासंगत हिस्सेदारी: गरब कम गरीब हो रहे, असफलताएं/गलतियाँ घरेलु/ अंतरराष्ट्रीय हो सकती, विकल्पों/outsourcing क़ा सहारा जरुरी;; खुला बाज़ार:पूंजीवाद की विजय- 1.नई बाज़ार व्यस्था: गैर पूंजीवादी होगी 2.सुचना कृंति होगी 3.असमानता :व्यस्थैएन धवस्त, संपन्न और संपन्न, गरीब=गरीब, दादागिरी, पूंजीवादी देशों क़ा गठजोड़ है-गरीब देशों से भेदभाव 4.बहुराश्त्रिये सत्तातंत्र-फिर भी भूख/ गरीबी बढ़ 5.जीवन क़ा मशीनीकरण + नैतिक संकट 6.फुकोयामा की व्याख्य="बुरे इतिहास क़ा अंत", २०वीं सदी= सदी  गली सदी थी 7.नया युगारंभ: कोम्मुनिज्म मर चूका, मर्किज्म/समाजवाद शुरू,  पूंजीवाद परेशान करता  8.बाज़ार की ताकत: शीत युद्ध के बाद-शक्तिशाली वित्तीय बाज़ार उदय/ उदारीकरण/ निजीकरण/ विनिवेश से पूंजी प्रवाह अछा  9.आर्थिक प्रतिद्वान्धिता: वैचारिक द्वेष घटेगा + आर्थिक प्रतिद्विन्धिता बढ़ेगी  भूमंडलीकरण लाभ: 1.शिक्षा- ज्ञान/सुचना/ IT / तकनीक/ परामर्श/ इन्टरनेट 2.पूंजी प्रवाह/निवेश /लोन विश्व बैंक  3.प्रवास/ श्रमिकों लाभ  4.निवेश/वित्त परामर्श 5.बाज़ार अर्थव्यस्था  6.आपूर्ति श्रीन्ख्लन(supply chain) 7.Global Trade /नियम 8.Tourism 9.Production 10.Trade Law-GATT/WTO 11.Medical 12. Crime 13.बौधिक सम्पदा(intelectual prop.)-TM/LOGO/कला 14.सकल घरेलु/ विश्व उत्पादन 15.पर्यावरण/प्राकर्तिक आपदाओं मदद 16.IT 17.Transport (यातायात)  18.संस्कृति 19.रोजगार-केवेल विकास-शील देशों 20.उदारवाद 21.महिला रोज़गार 22.पिछड़ों को लाभ 23.जीवन स्तर ऊँचा 24.मृत्यु दर कमी 25.लोकतंत्र को बढ़ावा 26.बुख्मारी कम UNICEF/NGO  27.मानवाधिकार को बल  (HRC) 28.मार्क्सवाद को बल  29.कृषि - तकनीक/बीज सुधरी लेकिन 30.मीडिया/ फिल्म जगत 31.विश्व शांति- संभव 32.सिकुड़ता globe  ३३.वैज्ञानिक खोज /सुरक्षा 34.कला/ संगीत जगत 35.सैन्य/ सुरक्षा को बल / आधुनिकीकरण 36.उग्रवाद निपटारा 37.प्राकृतिक संकटों;;