Tuesday, May 18, 2010
कृषि क़ा भूमंडलीकरण एवं विकाशशील देश (Agricultural Globalization and Developing Countries)
कृषि क़ा भूमंडलीकरण एवं विकाशशील देश- भारतीय कृषि 1. कृषि भारत मुख्य आजीविका, आजादी समय कृषि से प्राप्त राजस्व कम 2.राजस्व वृद्धि कारण=कृषि में वृद्धि 3.2000 सन- सरकार प्रथम राष्ट्रीय कृषि नीति घोषणा, नीति मुख्य उद्देश्य:1.कृषि विकास 2.ग्रामीण अवसंरचना मजबूत, 3.खेती प्रोत्साहन देना 4.कृषि कारोबार तेज 5.ग्रामीण रोजगार 6.किसानों -जीवन स्तर 7.शहरी क्षेत्रों में विस्थापना को हतोत्साहित करना 8.आर्थिक उदारीकरण/वैश्वीकरण से चुनौतियों सामना; नई कृषि/रोजगार/पशु पालन योजनाएँ:- A. राष्ट्रीय मृदा-स्वास्थ्य/ऊर्वरता प्रबंधन परियोजना, B.राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, C.राष्ट्रीय किसान नीति- 2007, D.राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, E.राष्ट्रीय बागवानी मिशन, F.राष्ट्रीय जैविक, G.उत्पादन कार्यक्रम, H.प्रधानमंत्री रोजगार कार्यक्रम (PMEGP) I.ग्रामीण उद्योग प्रचार कार्यक्रम J.कृषि क्लीनिक/ कृषि व्यापार योजना K.महात्मा गाँधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MNREGS), L.पशुधन बीमा योजना M.मत्स्योद्योग विकास एवं मछुआ कल्याणकारी योजनायें कृषि की सम्स्यें भूमंडलीकरण क़ा प्रभाव: 1.भुधारण सम्बन्धी सुधर/आर्थिक वि०= 2.जमींदारी शोषण, 3.कम होती ज़मीने 4.ऊँचे लगान 5.बंजर जमीने 6.तकनीकों क़ा आभाव 7.शहरीकरण 8.जमीने हथिअना/गुंडागर्दी 9.आत्महत्या 10.भुखमरी/कुपोषण 11.जमीने कम जनसँख्या 12.मंडीयों आभाव 13.उन्नत बीजों अभाव 14.ग्रामीण स्वस्थ्य/परिवार नियोजन 15.रिसर्च अभाव 16.युवा शहर की ओर 17.जल/सीचें समस्या 18.लघु उद्योगों/ बढ़ावा 19.IT/ सुचना/ संचार कमी 20.बीमा योजनायें/अज्ञानता 21.भोग विलास/शहर की हवा 22.प्राकृतिक आपदाएं 23.पूंजी उपयोग/निवेश जानकारी आभाव 24.अभिप्रेर्नाओं की कमी 25.आयात/ निर्यात फसलों जानकारी आभाव 26.देशी/ विदेशी मांगों पूरा न कर पाना =बहुमूल्य विदेशी मुद्रा आभाव 27.जमीन क़ा उपयोग न करने/ आलसी जमींदारों पर- जुर्माना लगाना चाहिए(जैसे दक्षिण अमेरिका) 28.वैकल्पिक आय के साधनों जानकारी आभाव 29. 30. 31. 32. 33. 34.
Monday, May 17, 2010
पुनह निर्माण और विकास के लिए अन्तेर राष्ट्रीय बैंक:
पुनह निर्माण और विकास के लिए अन्तेर राष्ट्रीय बैंक: (IBRD )- Inter. Bank for Recconstruction and Devp (or another name is World Bank) १९४४ में नीव, ब्रिटेन में वूड्स कांफेरेंसमें, : कार्य: IMF के लिए मुद्रा, IMF लघु ऋण देने हेतु बना था, युद्ध में हुई हनिओं भरपाई हेतु, छोटे/ अविकसित देशों की मदद, विश्व बैंक के उदेशेये: दीर्धकालिक ऋण, Long term foreign Investment Loans, 1.सदस्य देशों को ला देना २.युद्ध क्षति पूर्ति ३.उत्पादक सुविधाओं को शांतिपूर्ण परिवर्तिन करना, ४.निजी निवेश को मदद ५.ऋण गारंटी ६.योग्य शर्तों पर ऋण ७.अन्तेर्रश्त्रिये व्यापर संतुलन ८.सभी प्रोजेक्टों पर खरा ९.मोनिटरिंग करना/ रेसेअर्च करना; बैंक के सदस्यता; पाहिले भेदभाव था आजकल नहीं- कोई भी देश, application देनी होती, ७५% वोटिंग, नोतिसे देकर आप सदस्यता वापस भी ले सकते, नियमों क़ा उलंघन पर BLACK LISTING.; विश्व बैंक पूंजी स्थिति: आरंभ में १००० करोर थी 1 लाख शेरोंम में बाटी, १८% सदस्य देशों के मुद्रा चलता है, ८०% Callable Fund, कुल पूंजी क़ा २०% हे लता, उधर के लिए प्रयाप्त पूंजी, आजकल अधिकृत पूंजी बढ़ कर १७१ billion कर दी, 1.गवर्नरों क़ा बोर्ड है 2.प्रशासक निदेशक - कई देशों के 3.अध्यक्ष क़ा वोट होता 4.कमिटी गठित- सलाहकार/ उधर कमिटी उधर देने क़ा कार्य: 1.अपने वित्तों में से ऋण देता २.उधर के लिए पूंजी में से ऋण देता ३. रीनो के गुअरंती ४.उधर की शर्तें रखता- मूलधन/ ब्याज उचित, रिपोर्ट बनता, व्हिते लिस्ट जारी करता, सही ब्याज दर, रिस्क कम होते 6.अत्यधिक ऋण माध्यम आय वाले देशों को सहायता: (Middle Income companies को सहायता देना) - 19856 se जरुरत मंदों को लाभ; जरुरतमंदों के लिए ढील, ऋण अनुपात बन्दे/ देश के अनुसार, निति नुकसान करे तो बदल देता, विश्व बैंक क़ा मूल्यांकन: (1998 Based Results) Member countries=- 151, Subscribed Capital(समर्पित पूंजी)=91436, लोन पास=14762 -1,16 ,360, Disbursment(अदायगी)-1636, Operations Approved(अनुमोदन):118, Lending ऋण सञ्चालन/ Operations of the IBRD upto June30, 1988: 1. Krishi-32051, Devp. Finance Corp.=15452, Education=5610, Energy=34330, Industry=10973, Pupulation/Health=851, 7.Small Business=3891, Telecom=2543, Urban Devp=6189, Other=11231; World Peace=आर्थिक/ मानसिक मदद,
क्षेत्रीय एवं द्विपक्षिये/ बहुपक्षिये समझौते (Reginal/ Biletral/ Multilateral Agreements)
क्षेत्रीय एवं द्विपक्षिये/ बहुपक्षिये समझौते (Reginal/ Biletral/ Multilateral Agreements): राष्ट्र हित हेतु नीतियाँ/ प्रतिबंधन नीतियाँ बनता, अंतरराष्ट्रीय नीतियां, आजकल में एक्पक्षिये/द्विपक्षिये है पाहिले द्विपक्षिए, द्विपक्षिये अधिक लाभकारी क्योकी -क्योकी समझौते अल्पकालिक/ शंशोधन संभव जबकि बहुपक्षिये में सकत नियम, कोटा प्रणाली, 1. द्विपक्षिए व्यापार समझौते- आपसी विचार, दोनों क़ा लाभ संभव, भुगतान संतुलन, आसान compromise, मात्र/ माल उचित निर्धारण, मुद्रा समस्या कम, 2.द्विपक्षिए व्यापार के रूप- तीन प्रकार होते: (i).निजी क्षतिपूर्ति-क्षतिपूर्ति अग्रीमेंट/ बीमा आदि से बचाव (ii).समाशोधन समझौते: आयात क़ा भुगतान अपना देश केंद्रीय बैंक करता, बैंकों द्वारा लेन देन नियंत्रित, लिसेंस जरुरी नहीं, दीर्धकालिक समझौते (iii).भुगतान समझौते-समाशोधन से अधिक प्रभ्व्शाली, विनमय नियंत्रण, भुगतान संतुलन, surplus तैयार करना, जमापूंजी से ऋण अदा, बहु उदेशेये प्रणाली होती, 3.द्विपक्षिए व्य्हपार साम्झौतों की विशेषताएं: (i)1-5 वर्ष अवधि शंशोधन संभव (ii)एक दुसरे को अधिकतम व्यापर सुविधाएँ/ मुनाफा (iii)द्व० विश्व यु० के बाद से केवल दो देशों के बिच (iv)दोनों फर्म/ देश आयत निर्यात प्रबंधन करते (v)भुगतान देश केंद्रीय बैंक द्वारा- कानून मन्ये (vi)कम परेशानी वाले कानून, असुरक्षा दोनों के लिए खतरा 4.द्वापक्षिये व्यापर समझौतों के उदेशेये- (i)विनमय दर स्थिरीकरण- स्थिर दर= अर्थव्यस्था वृद्धि (ii)औद्योगिक उन्नति- बहुआयामी लाभ (iii)विदेशी व्यापर वृद्धि- सम्बन्ध विस्तार/ लम्बे और स्वस्थ सम्बन्ध (iv)एकाधिकार क़ा लाभदायक उपयोग-अधिकारों क़ा बटवारा, माल संकेन्द्रण से लाभ (v)विदेशी विनमय क़ा मित्व्ययातापूर्ण(economical) प्रयोग:दुर्लभ मुद्रा वाले देश से कठिनाई, अपने पास विनमय शक्ति अची होनी चाहिए (vi)संरक्षण की आवश्यकता- ताकि प्रतिस्पर्धा बावजूद अधिक से अधिक निर्यात (vii)आवश्यक उपभोगता वस्तुओं की prapti (viii)विदेशी पुनती दुरूपयोग पर प्रतिबन्ध 5.द्विपक्षिए (क्षेत्रीय) समझौतों क़ा मूल्यांकन: लाभ: 1.भुगतान संतुलन २.हानिकारक आयात पर रोक, ३.तीव्र गति से लाभ, ४.भुगतान कठिनयन कम ५.स्वंत्र पूंजी प्रवाह ६.प्रथ्स्पर्धा कम होती हनी/आलोचनाएँ: 1.विकाशशील देशों क़ा विश्व व्यापर में कम योगदान-द्विपक्षियेता में बहुपक्षिये देशों को हानि २.शोषण की प्रवृत्ति-विकसित देश विकासशील क़ा शोषण करते, दबाव रहेता, ३.द्विपक्शिअत क़ा आदि होना- लत लग्न 6.भारत क़ा द्विपक्षिए व्यापर समझौते: लाभ हो रहा, विद्वान मानते की अभी उपयोगी नहीं, शोषण भी होता, भारत को लाभ: बहुपक्षियेता और द्विपक्षियता विधमान इसीलिए लाभ;; बहुपक्षिये व्यापार समझौते: कई देशों के साथ होते, द्वितीये विश्व युद्ध के बाद से अस्तित्व, विक्षत/विकासशील देशों को लाभ मिला, श्रम विभाजन से लाभ, अल्पविकसित देशों के शोषण में कमी, लाभ: 1.कई देश शामिल इसीलिए मनमानी असंभव, २. दीर्ध(लम्बी) अवधि के होते hence लाभ ३.गुणवत्ता युक्त उपभोगता और तकनीशियन ४.एकाधिकार हनन असंभव ५.शोषण नहीं होता ६.सभी देशों आर्थिक उन्नति ७.सभीका सामान मुलांकन= समानता, भेद्भाव्हीनता, ८.एक ही मुद्रा/मुद्राओं क़ा सामान विनमय, ९.व्यापक रियतें १०.विश्व बाज़ार विकास उन्नत ११. दोषरहित विनमय १२, भेदभाव हीनता; बहुपक्षिये संस्थाएं: International Labour Organization (ILO), Food and Agriculture Organization of the United Nations (FAO), United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization (UNESCO), (WHO), International Bank for Reconstruction and Development (IBRD)- मुद्रा कोष, पुनर्निर्माण/ विकास बैंक, International Monetary Fund (IMF)- मुद्रा कोष, पुनर्निर्माण/ विकास बैंक , International Civil Aviation Organization (ICAO), Universal Postal Union (UPU), International Telecommunication Union (ITU), World Meteorological Organization (WMO), International Maritime Organization (IMO), International Fund for Agricultural Development (IFAD), United Nations Industrial Development Organization (UNIDO), International Atomic Energy Agency (IAEA), (WTO),;;
भुमंद्लिये वित् एवं उष्ण मुद्रा प्रवाह (Hot Money Flow):
भुमंद्लिये वित् एवं उष्ण मुद्रा प्रवाह (Hot Money Flow): 1.भुमंद्लिये वित्त-अर्थात पूंजी उपलभतता से विकास दर निर्धारित होती, ९० के दशक में अधिक विकास, नई चुनौतियन, २.बाज़ारों क़ा एकीकरण 3.मकरो इकोनोमिक प्रबंधन 4.पारदर्शिता 5.पूर्व एशिआई संकट से सिखा 6.स्वस्थ मुद्रा स्फीति दर 7.स्वस्थ ब्याज दरें 8.उष्ण मुद्रा प्रवाह= स्वतंत्र पूंजी गतिशीलता, पूंजी आभाव नहीं होना चाहिए, स्वस्थ EQUITY बाज़ार 9.स्वस्थ accounting मानदंड- उछ मानक 10.mutual fund 11.pension fund 12.GPF 13.Equity 14.RD/ FD 15.बीमा Policy 16.बचत पत्र 17. Gold/ Metal Investment 18.Property Investment, नई विश्व अर्थव्यस्था: 1.एकीकृत/ एकीकरण जरुरी 2.प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी 3.व्यपार अवसर बढ़ेंगे 4.बहुपक्षिये व्यापर होगा 5.अवरोध दूर हो चुके 6.श्रम/ पूंजी प्रबंधन अच्छा हो रहा है 7.सीमापार प्रतिबन्ध सुधरने प्रयास जारी 8.व्यग्निक अविष्कार जारी 9.पूंजी क़ा संवेदनशील प्रयोग जरुरी (हो भी रहा है)
आन्तराष्ट्रीय निगम तथा भूमंडलीकरण प्रक्रिया
आन्तराष्ट्रीय निगम तथा भूमंडलीकरण प्रक्रिया: बहुराश्त्रिये निगम तथा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश + प्रोद्योगिकी प्रवाह: विदेशी निवेश की समस्या: 1. 1955- रिओ दे जनेरो सम्मलेन जार्ज हम्फ्रे क़ा विवादस्पद भाषण, 2.अविश्वास ३.पडोसी देश सम्बन्ध ४.उचित जानकारी/परामर्श आभाव ५.विश्वास ६.कानून ७.स्वाभ ८.ऐतिहासिक मित्रता; विदेशी विनयोग क़ा लाभ: 1.आर्थिक विकास 2.तकनिकी लाभ/ बहार से तकनीशियन आते जैसे USA में इंडिया से 3.पटेंट लाभ: कर्येशील कंपनी को 4.सुचना/ यातायात लाभ; विदेशी विनियोग क़ा विरोध: 1.राष्ट्र हित देखना 2.उपनिवेश साम्राज्य न बने-जैसे east india company 3.ब्याज/ लाभांश क़ा खतरा 4.अफ्रीका विभाजन उद्धरण है 5.कर्जों से युद्ध/ झगडा-जैसे जर्मन युद्ध पोत 6.शीत युद्ध क़ा खतरा विरोध के कारण: 1.विदेशी कोम्पनी घुस/ लालच देती- अच्छे पद प्रलोभन 2.हस्तक्षेप की धमकी 3.विशेषाधिकारों हनन 4.अविश्वास 5.1930 के दशक में घोर मंदी, राष्ट्रवाद क़ा उदय: 1. अल्पविकसित देशों को खतरा, 2.सुविधाएँ खोलना- सकारात्मक आयाम; फार्म के आन्तरिक तथा फिर्मो के बिच व्यापार की समस्या: faith relation -1.विदेशी विनयोग/ साधनों की कमी: पूंजी की कमी, तकनिकी/ कानून/ श्रम/ परामर्श/ प्रबंधन/ कमी, 2.विदेशी विनयोग शर्तें: (i).कानूनों क़ा पाबंद/ इज्जत (ii).समानता/ विशेषाधिकारों-इज्जत/ पक्षपात नहीं (iii).स्थानीय लोग ही/ स्थानीय कच्छा माल/ labour law इज्जत (iv).MNCजिस देश में आये उसमे ही लाभान्वित पूंजी- ना की अपने देश (v).MNC को स्थानीय राजनीती हस्तेक्षेप नहीं (vi).लाभ पूंजी क़ा कुछ ही हिस्सा अपने देश बाकि यहीं खपाओ 3.आन्तर राष्ट्रीय उत्पादन संजाल (business नेटवर्क): विदेशों में इकाइयाँ (जाल) लगाना/बनाना, तकनिकी नेटवर्क बनाना, काछे मल क़ा नेटवर्क, क़ानूनी जानकारी, नेटवर्क के खतरों से चौकन्ना, संजाल हेतु विदेश नीतिओं क़ा ज्ञान, विकसित/विकासशील देशों जानकारी, storage ज्ञान; अन्तेर्रश्त्रिये पूंजी बाज़ार क़ा ढांचा / कार्यप्रणाली: विभिन्न मुध्हे जैसे = 1.विनमय दर 2.रिजर्व निति 3.निजी क्षेत्र की भूमिका 4.पूंजी प्रवाह 5.प्रबंधन 6.वित्त प्रणाली/ सशक्तिकरण 7.पारदर्शिता 8.मानक 9.अन्तेर्रश्त्रिये संस्थाएं (WTO, World Bank, GATT) 10.मुद्रा संकट निवारण- मुद्रा बोर्ड गठन 11.कीमत नियंत्रण 12.बैंक हस्तेक्षेप जरुरी 13.नीतिगत उपाए-ऋण सेवा, सेंट्रल बैंक, मुद्रास्फीति दर/ संतुलन 14.मौद्रिक निति- विनमय दर, ब्याज दर, मुद्रा भंडार आकर 15.भारत की निति:1993 में विकसित, मांग/पूर्ति प्रबंधन, अच्छे बाजार विकसित, फोरेक्स बाजार सर्तार्कता अछि, मार्केट लचीली 16.अन्तेराष्ट्रीय भण्डार: 1.विदेशी मुद्रा भंडार-मौद्रिक निति, मुद्रास्फीति नियंत्रण, आपातकाल प्रबंधन, खतरों से बचाव जानकारी, एशिई संकट से उदहारण, 17.पूंजी प्रवाह: 1.भारत में हम गई ऋण उत्पादक प्रवाहों और जोर न देने वाले ऋण अल्पकालीन ऋण से भण्डारण कर रहे है 2.1993- भुगतान संतुलन समिति (रंगराजन समिति) रिपोर्ट 3.रिजर्व बैंक नियमों 4.जोखिम नियंत्रण 5.तेल कीमत वृद्धि- प्रबंधन (2002 में विदेशी मुद्रा भंडार ४.९२ बिलियन $ था, जबकि 1999-2000 में 5.5 बी); अन्तेराष्ट्रीय सम्पदा (Assets) व्यापार: 1.पूंजी-अंतररा० Transfer प्रक्रिया- पूंजी हस्तांतरण 2.1918 yudh मुआवजे सम्पदा अदन प्रदान 3.विदेशी मुद्रा/ स्टॉक लाभ 4.मुद्रा के प्रकार -सोना, वास्तु, यूरो, dollor , money transfer, virtual money 5.क्षति पूर्ति भुगतान-सोने के स्थान पर वस्तुओं द्वारा चुकाना gold क़ा sanrakshan 6.मिल:सोने क़ा हस्तांतरण रोकना संभव 7.नए सिधांत: केन्स"युद्ध काल में मुद्रा चलन/ मदद/ भुगतान, ऋण" 8.सिधांत/ सत्ये- कथनी करनी में फरक 9.ओलिं के विचार- "एक से मुद्रा से सोने क़ा स्थानान्तरण रुकेगा" इंग्लैंड स्कॉट्लैंड मामला 10.क्रय शक्ति क़ा हस्तांतरण: ऋण के कारण करए शक्ति हस्तांतरण, (क)उधर लेने वाला देश धन विदेशों में लगता तो स्वर्ण हस्तांतरण से बचाव 11.अगर अपने ही देश में उधार क़ा धन लगाना- तो क्रय शक्ति से- मूल्य बढेंग, लेकिन बचाव संभव 12.ऋण क़ा हस्तांतरण- ऋण अंत में वस्तुओं / सेवाओं के रूप में एक से दुसरे देश वापस जाता, सही प्रबंधन से सोने क़ा स्थानान्तरण रुक सकता, तटपारिये बैंकिंग / विदेशी बैंकिंग: अमेरिकेन फेडेरल Reserve Act 1913-अपने उच्ता प्राप्त बैंकों को विदेशों में शाखा अनुमति दी है, "कोई भी नेशनल बैंक विदेशों में ब्रांच - लेकिन उसमे अपनी पूंजी -स्टोक क़ा १०% से अधिक विनयोग नहीं करेगा", अभी तक ४०० से अधिक शाखाएँ, उपयोगिताएं/ लाभ: 1.यूरो / dollor क़ा बढ़ता उपयोग- 2.जापान क़ा विशिष्ट विदेशी विनियम बैंक- 1954 "Bank of Tokyo" japan में २५ शाखा, विदेश में १८, agency २०, प्रधान कार्यालय USA में 3.जापान में विदेशी बैंक- 1970 में १८ विदेशी बैंक थे, बैंक law के अंतर्गत लिसेंस जरुरी, एन में ऋण चलता, न्युयोर्क, लन्दन, मुंबई, पेरिस में शाखाएं, विदेशी महत्त्व खास नहीं 4.विदेशी विनियम क़ा कार्य (Foreign Exchange Importance)- लिसेंस देना , Law Making, Exchange Rates Controler, Counselling, Liberal Actions 5.Euro मुद्रा- 1.Urope की मुद्रा, 27. सदस्य राष्ट्रों में 16. द्वारा प्रयोग, आस्ट्रिया, Belgium , Siprs, Finland, Frans, German, Grees, Ayland, Itly, Lkjembrg, Malta, Nirherland, . 174 देशों द्वारा प्रयोग , $ के अछि अरक्षित मित्र, 2009 में 790 billion से अधिक, 2. यूरो क़ा विकास - 16,Dec.95 को astitv, 1999 me E.C.U द्वारा प्रयोग , 2002 में सिक्के / not, 2009 me lisbn sandhi hence uropean mudra bani, prabandh/ prashasan: Uro Deshon ke Kendriye Bank Sangathan 'uro system' dwara hota, 1992 mastrikt sandhi- hence Uro ko apnana anivarye (bhedbhav jari hai), Uro Currency (Type)-100 Cents, 1-2, 3 Cent ke sikke, Natonal SIgn Printed, Euro hastantran: sabhi hastantran= gharelu bhugtan, credit, debit, ATM nikasi, Home rates(dar) par hastantran, Euro ka prachalan:1992 mastrikt sandhi dwara prachalit, kadi sharten, jaise GDP 3% se mam bajag ghata, 60% se kam rin. Euro Nirmata(Khojkarta): Fred Arditti, Neel Dowling, Vim Dusem Barg, Robert Mondel, Tomaso Pdoa, Shioppa, robert Tolisn.
आर्थिक गतिविधि क़ा भौगोलिक ढांचा
आर्थिक गतिविधि क़ा भौगोलिक ढांचा: 1.कचे माल वितरण- सुलभ यातायात मार्ग, उदहारण east इंडिया co, मौर्य, 2.जैविक स्संराचना/जीव: जीवों पारिस्थितिक स्थिति 3.जिवोम/आवास:जलवायु(BIOM/HABITAT)-पर्यावरण/biomass 4.मिश्रित जलवायु: भारत, रूस, चीन...=अधिक पैदावार 5.भोगौलिक कारक: गंगा घटी, समुद्री मार्ग, अलक्जेंडर गमन, बंदरगाहों विकास 6.खनिज/धातु उपलब्धता: भारत(Pb,Zn ,Diamond, Oil, Fe, कोयला उरेनियम), रूस, अफ्रीका, अमेरिका, अंतर राष्ट्रीय व्यापार के रूप: 1.व्यापर नीति: भगौलिक विभाजन, प्लानिंग, मैनेजमेंट, +ve कानून 2.रिकार्डो क़ा सिधांत:"हर देश की अपनी विशेषता- जैसे=कच्छा माल/श्रमिक/ उत्पादक/ तकनिकी"..., 3.लिस्ट की आलोचना: भेदभाव/ कर/ जरुरी, पंचों उँगलियाँ बराबर नहीं 4.लोहिया के विचार: "मेहनत के हिसाब से कीमत होनी - न की मल की मात्र के हिसाब से जैसे- 1. करोड़ क़ा मल अलग अलग देश अलग समाये में.." विदेशी प्रत्यक्ष निवेश तथा पूंजी प्रवाह: 1.पूंजी प्रवाह प्रबंधन: अशिई संकट से बहस, अंतरा० बैंक, money transfer, ऋण, भण्डारण, परामर्श, मुद्रा कोष, कानून, पूंजी/ कर, निवेश, exchange rate 2.वित्तीय प्रणाली क़ा सशक्तिकरण: IAF (अन्तर्र० प्रमाणन मंच) बहस/ सुझाव A.सुव्वावस्थित संरचना B.पूर्ण न्याय C.corporate नियंत्रण D.audit प्रणाली E.सक्षम भुगतान, F.पूंजी G.जोखिम H.IOSCO-मार्गदर्शन;;
संप्रेक्षण प्रद्योगिकी में विकास
संप्रेक्षण प्रद्योगिकी (IT/Communication Tehnology)में विकास: POSITIVE: 1.सुचना क्रांति-भूमंडलीकरण में सहयोग -व्यापर के अवसर , 2.ज्ञान वृध्ही 3.शिक्षा में लाभ 4.सचित्र विवरण 5.तकनिकी सुरक्षा 6.भाषा विस्तार 7.व्यापार अवसर/ नया बाज़ार 7(a).online income 8.सर्च ENGINE 9.राष्ट्रीय/ अन्तेर्रश्त्रिये कानून जानकारी 10.उदारवाद को बल- ब्लोग्स 11.ब्लॉग्गिंग सुविधा 12.chatting द्वारा भुमंद्लिये विकास 13.सांस्कृतिक अदन प्रदान 14.तकनिकी विकास 15.पर्यावरण 16.शब्दकोष 17.आर्थिक 18.राजनैतिक लाभ 19.चिकित्सा जगत 20.इंजिनियर 21.न्यूज़ 22.चलचित्र/U-Tube 23.मीडिया जगत 24.नौकरी-देश विदेश 25.विवाह-देश विदेश 26.सुचना store 27.देश सुरक्षा 28.किसान लाभ 29.भौगोलिक ज्ञान ;;
NEGETIVE - 1.आतंकवाद / गोप्निअता 2.भाषा 3.सेक्स/ सांस्कृतिक 4.हथिआर/ बम 5.खतरनाक सूचनाएं 6.chatting- मानसिक युद्ध 7.भौगोलिक ज्ञान-चोरी 8.hacking 9.spamming 10.virus 11.saftwate चोरी 12.wrong identity (orkut) 13.जासूसी 14.धोखेबाजी/ ठगी (cyber crime) 15.गलत सूचनाएं 16.ip tracking जासूसी 17.Bagging/ illegal donations 18.health/ बीमारियाँ;
NEGETIVE - 1.आतंकवाद / गोप्निअता 2.भाषा 3.सेक्स/ सांस्कृतिक 4.हथिआर/ बम 5.खतरनाक सूचनाएं 6.chatting- मानसिक युद्ध 7.भौगोलिक ज्ञान-चोरी 8.hacking 9.spamming 10.virus 11.saftwate चोरी 12.wrong identity (orkut) 13.जासूसी 14.धोखेबाजी/ ठगी (cyber crime) 15.गलत सूचनाएं 16.ip tracking जासूसी 17.Bagging/ illegal donations 18.health/ बीमारियाँ;
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